Tumbbad Full Story in Hindi: वो श्रापित गांव जहां खजाना नहीं, सिर्फ मौत बरसती है!


चेतावनी: इस कहानी को रात में अकेले न पढ़ें। तुंबाड का श्राप शब्दों के जरिए भी आप तक पहुंच सकता है... 

क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां सूरज कभी नहीं निकलता? जहां साल के 365 दिन सिर्फ काले बादल छाए रहते हैं और बिना रुके बारिश होती रहती है? 

जी हां, हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के एक काल्पनिक लेकिन रोंगटे खड़े कर देने वाले गांव 'तुम्बाड' (Tumbbad) की।




आज हम आपको वो कहानी सुनाएंगे जिसे पर्दे पर देखकर लोगों की रूह कांप गई थी। 

अध्याय 1: भूखी दादी और श्राप का सबूत 

कहानी 1918 के भारत से शुरू होती है। तुंबाड गांव की एक पुरानी हवेली (Wada) में एक 'दादी' रहती है। 

लेकिन वो कोई आम इंसान नहीं है। वो सदियों से जिंदा है, लेकिन उसका शरीर सड़ चुका है। उसकी खाल से पेड़ की जड़ें निकल आई हैं और उसे लोहे की जंजीरों में बांधकर रखा गया है। 

दादी का कनेक्शन क्या है? 

दादी उस श्राप का जीता-जागता सबूत है। सालों पहले दादी ने भी हस्तर के उस सोने को छुआ था, जिसके कारण उसे "अमरता" (Immortality) का श्राप मिला। वो न मर सकती है, न जी सकती है। उसे सिर्फ भयानक भूख लगती है। 

छोटा विनायक दादी से ही उस खजाने का राज़ जानता है। जब दादी भूख से तड़पती है, तो विनायक उसे कहता है— 

"सो जा दादी... वरना हस्तर आ जाएगा!"

हस्तर का नाम ही वो चाबी थी, जिससे विनायक को समझ आया कि हवेली के नीचे कुछ तो खतरनाक है।




अध्याय 2: हस्तर की कहानी (The Legend) 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड बना, तो देवी माँ (Goddess of Prosperity) ने 16 करोड़ देवताओं को जन्म दिया। उन सबमें उनका सबसे लाडला बेटा था—हस्तर। 

हस्तर महा-लालची था। उसे देवी माँ का सारा सोना (Gold) और सारा अनाज (Food) चाहिए था। उसने सोना तो हड़प लिया, लेकिन जैसे ही उसने अनाज को हाथ लगाया, बाकी देवताओं ने उस पर हमला कर दिया। 

हस्तर मारा जाता, लेकिन देवी माँ ने उसे बचा लिया और अपनी कोख (Womb) में वापस रख लिया, लेकिन एक श्राप के साथ— 

"हस्तर, तुझे कोई नहीं पूजेगा। तेरा नाम इतिहास से मिटा दिया जाएगा और तू हमेशा भूखा रहेगा।" 

अध्याय 3: खजाने की खोज और मौत का खेल 

विनायक बड़ा होकर उसी हवेली में लौटता है। उसे पता चलता है कि हस्तर देवी माँ की कोख में कैद है, और वो कोख उस हवेली के नीचे बने एक कुएं (Well) में है। 

विनायक ने जान की बाजी लगाकर एक तरीका खोज निकाला: 

1. वो कुएं में रस्सी डालकर उतरता। 

2. हस्तर को खाने के लिए आटे की गुड़िया (Dough Doll) का लालच देता। 

3. जैसे ही हस्तर गुड़िया खाने में व्यस्त होता, विनायक उसकी कमर से सोने के सिक्के छीनकर भाग आता। 

लेकिन एक शर्त थी—उसे "लाल घेरे" (Safety Circle) के बाहर भागना पड़ता था। यह मौत और जिंदगी की रेस थी। 

अध्याय 4: वो खौफनाक गलती (The Climax) 

विनायक अब बूढ़ा हो चुका था। उसने सोचा कि रोज-रोज कुएं में उतरने से अच्छा है कि एक बार में ही खेल खत्म किया जाए। 

उसकी नजर सिक्कों पर नहीं, बल्कि हस्तर की जादुई लंगोट (Loincloth) पर थी। अगर वो लंगोट मिल जाती, तो उसे जीवन भर सोना मिलता रहता। 

उसने एक "मास्टरप्लान" बनाया— 

"मैं एक नहीं, बल्कि बहुत सारी आटे की गुड़िया ले जाऊंगा। हस्तर उन्हें खाने में देर तक उलझा रहेगा और मैं उसकी लंगोट लेकर भाग जाऊंगा।

विनायक ने अपनी कमर पर दर्जनों गुड़िया बांधी और अपने बेटे पांडुरंग के साथ कुएं के अंधेरे में उतर गया। 

लेकिन वहां पहुंचकर जो हुआ, उसने सबके होश उड़ा दिए। 

कुदरत का नियम था— "एक गुड़िया के लिए एक हस्तर।" 

विनायक ने जितनी गुड़िया निकाली थीं, वहां उतने ही हस्तर पैदा हो गए। देखते ही देखते उस अंधेरे कुएं में हजारों लाल हस्तर प्रकट हो गए। 

जो हस्तर कभी अकेले आता था, आज वो एक पूरी फौज बनकर उन पर टूट पड़ा। 

विनायक को अपनी गलती का अहसास हो गया। उसने चिल्लाकर अपने बेटे से कहा— "भाग जा! मुझे छोड़ और भाग जा!" 

लालच ने अंत में विनायक को निगल लिया। उसने अपने बेटे को बचाने के लिए खुद को उन हजारों राक्षसों के हवाले कर दिया। 

निष्कर्ष: क्या सीखा हमने? 

फिल्म का आखिरी सीन दिल को झकझोर देता है। विनायक का बेटा उस श्रापित हवेली को हमेशा के लिए बंद करके चला जाता है। 

इस कहानी को देखकर एक ही बात याद आती है— 

"हर युग का अपना रावण होता है, और हर रावण का अपना दशहरा।

विनायक के लिए उसका 'रावण' कोई और नहीं, बल्कि उसका अपना लालच था। और अंत में हस्तर ने उसका 'दशहरा' कर दिया। 

Tumbbad हमें सिखाती है कि दुनिया में पेट भरने के लिए अनाज काफी है, लेकिन इंसान का लालच भरने के लिए पूरी दुनिया का सोना भी कम है। 

🎬 फिल्म रेटिंग और जानकारी (Movie Info) 

• मेरी रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐⭐ (5/5)

• IMDb रेटिंग: 8.2/10

• कहां देखें: Amazon Prime 


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